शक्ति संवर्धन करना है

अन्धिआरी रातों में दीपक बनकर जलना है
शक्ति संवर्धन करना है ।

है अनंत ऊर्जा आत्मा में, महावीर की वाणी
सबल प्रेरणा गुरु तुलसी से मिली हमें कल्याणी
महाप्रज्ञ का दिशाबोध ज्योतिर्मय झरना है ।।

बौद्धिकता के साथ नम्रता, सहनशीलता जागो,
स्वाभिमान को रहे बांधते, अनुशासन के धागे,
हो संकल्प, समस्याओं का सागर तरना है ।।

बेटा बेटी दोनों आत्मज, हो दोनों का अंकन
श्री ह्री धी संपन्न और समता का मूल्यांकन
इस दुनिया के मानचित्र पर हमें उभारना है ।।

नभ सा विस्तृत कार्यक्षेत्र है, सघन हमारी निष्ठा,
चारित्रिक शुचिता के बल पर, बढती रहे प्रतिष्ठा,
कठिन कसौटी पर भी हमको खरा उतरना है ।।

आदर्शों की ठोस जमीं पर, प्रतिदिन चलती जाएं,
हो मजबूत हौसला इतना, कभी नहीं घबराएं,
जीवन रण में अनेकांत के साथ उतरना है ।।


- साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी


प्रेरणा गीत

हो संकल्प सत्य शिव सुन्दर ऊंची एक उड़ान भरें ।
बनकर हम सूरज की किरणें युगधारा में प्राण भरें ।
आओ बहनों ! जागो बहनों । हो ....

लिखें क्रान्ति की नई ऋचाएँ खुद उनको पढ़ते जाए
शक्ति भक्ति की ज्योत जला, इतिहास नया गढ़ते जाएं
मजबूत इरादों वादों से हम जागृति का आह्वान करें ।।
आओ बहनों ! जागो बहनों । हो ....

शुभ भविष्य भावी पीढ़ी का नारी की ज़िम्मेदारी
रहे शुद्धता खान - पान की हो पक्की पहरेदारी
नशा मुक्ति है मंत्र शक्ति का घर – घर यह संगान करें।।
आओ बहनों ! जागो बहनों । हो ....

श्रद्धा, सेवा और समर्पण नारी का अपना सपना
समता, ममता, सहनशीलता, तप यह जीवनभर तपना
संयम और सादगी द्वारा अपनी हम पहचान करें ।।
आओ बहनों ! जागो बहनों । हो ....

पद-यश-लिप्सा से दूर रहें, कर्त्तव्य – बोध बढ़ता जाए
ग्राफ हमारा गुणवत्ता का, ऊपर नित चढ़ता जाए
काम करें निष्काम भाव से, गण – गणपति हित बलिदान करें ।।
आओ बहनों ! जागो बहनों । हो ....

हुआ जागरण भाग्योदय से तुलसी प्रभुवर की आभारी
अलख जगाती रहे रात – दिन जुड़े संघ से इकतारी
ऊर्जा पाकर महाश्रमण से चरणों को गतिमान करें ।।
आओ बहनों ! जागो बहनों । हो ....



अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा जनहित में जारी

स्वच्छ भारत गीत

रचयिता – साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी

स्वच्छ हो प्यारा हिंदुस्तान ।
माटी महके, पंछी चहके उतरे स्वर्ण विहान ।।

सोने की चिड़िया भारत का गौरव सदा बढ़ाएं,
इसके अमल ह्रदय से कचरे का अम्बार हटाएं ।
जिम्मेदारी हर मानव की बने सफल अभियान ।।
स्वच्छ हो प्यारा हिंदुस्तान

जाति भिन्न हैं, प्रांत भिन्न हैं ऊपर एक गगन है,
धर्म भले हो भिन्न सभी का लेकिन एक वतन है ।
मिटे प्रदूषण तन का मन का, कुदरत का आह्वान ।।
स्वच्छ हो प्यारा हिंदुस्तान

स्वस्थ रहें हम मस्त रहें आश्वस्त रहें वसुधा पर,
रहें सुरक्षित खेत हमारे जंगल नदियां भूधर ।
सुन्दर घर हो, सुन्दर अम्बर बने नई पहचान ।।
स्वच्छ हो प्यारा हिंदुस्तान

हिमगिरि – सी ऊंची संस्कृति है धर्मों की फुलवारी,
कहीं हमारे कारण ना हो जाए यह बेचारी ।
सहनशील धरती का दोहन करे नहीं इंसान ।।
स्वच्छ हो प्यारा हिंदुस्तान